Class 8 History | Chapter 3 ग्राम्य-जीवन और समाज: शिल्प तथा उद्योग

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 (क). सही विकल्प पर ✅ का निशान लगाइए -

1. प्लासी का युद्ध हुआ —

उत्तर: (i) 1757 ई० में


2. कृषि पर आधारित उद्योग है —

उत्तर: (i) चीनी उद्योग


3. 1890 में किसके नेतृत्व में हुए विद्रोह को कुचल दिया गया था?

उत्तर: (ii) बिरसा मुंडा के


4. किस शताब्दी के अंत तक साहूकार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गंभीर अभिशाप बन गए थे?*

उत्तर: (i) 19वीं शताब्दी में


5. नव जमींदार सामान्यतः कहाँ रहते थे?

उत्तर: (i) शहरों में


6. जर्मन के सिंथेटिक उत्पादों ने किस उद्योग को बाजार से पिछाड़ दिया था?

उत्तर: (ii) नील उद्योग को


ग्राम्य-जीवन और समाज: शिल्प तथा उद्योग


(ख). सही वाक्यों के सामने ✅ तथा गलत वाक्यों के सामने ❎ का निशान लगाइए -


1. कंपनी ने अपनी राजनीतिक शक्ति का उपयोग तानाशाही के अर्थ में किया। ✅

2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी 1757 ई० में भारत आई। ❎

3. किसान उत्तरोत्तर दरिद्र होते चले गए। ✅

4. दीनबंधु मित्र ने 1860 में 'नील दर्पण' नामक एक नाटक लिखा। ✅

5. बंगाल से अंग्रेजों द्वारा धन का अपहरण अथवा दोहन 1850 ई० में प्रारंभ हुआ। ❎

6. अंग्रेजों ने भारत की धन-संपदा एवं संसाधनों का ह्रास को जमकर निर्यात किया। ✅

7. अंग्रेज चिरस्थायी रूप में अर्थात अंत तक केवल विदेशी ही बने रहे। ✅


(ग). सही जोड़े बनाइये -


1. खोंड - (iii) ओडिशा

2. कोल - (iv) मेघालय 

3. मेर - (i) राजस्थान

4. संथाल - (ii) बंगाल


(घ). रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -


1. भारत से कच्चे माल के निर्यात के लिए जोर दिया जाता था।

2. रैयतवाड़ी तथा महालवाड़ी क्षेत्रों के किसान धीरे-धीरे बुरी तरह से कर्ज में डूब गए।

3. भारत अंग्रेजों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली औपनिवेशिक बस्ती बनकर रह गया।

4. रेशम तथा सूती वस्त्र उद्योग भी संतोषजनक स्थिति में नहीं था।

5. ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय कृषि का व्यापारीकरण प्रारंभ हुआ।

6. अंग्रेज चिरस्थायी रूप में अर्थात अंत तक केवल विदेशी ही बने रहे।

7. भारतीय हस्तशिल्प की बर्बादी उन कस्बों या शहरों में स्पष्टतः परिलक्षित हुई, जो अपने हस्तशिल्प के लिए विख्यात थे।

8. बंगाल से अंग्रेजों द्वारा धन का अपहरण तथा दोहन 1757 ई० में प्रारंभ हुआ।


(ङ). कारण बताइए -


1. भारत में नील की खेती को बढ़ावा दिया गया।

कारण: क्योंकि अंग्रेजों को यूरोप में कपड़ा उद्योग के लिए नील की बहुत मांग थी। नील से नीला रंग बनता था जो कपड़ों को रंगने में काम आता था। इससे अंग्रेजों को ज्यादा मुनाफा होता था, इसलिए उन्होंने किसानों को जबरदस्ती नील उगाने पर मजबूर किया।


2. किसान साहूकारों के कर्ज के नीचे दब गए थे।

कारण: क्योंकि अंग्रेजों ने लगान बहुत बढ़ा दिया था और वह नकद में देना पड़ता था। फसल खराब होने पर भी लगान माफ नहीं होता था। किसान को लगान देने और बीज-खाद के लिए साहूकार से ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता था, और ब्याज बहुत ज्यादा होने से वे कर्ज से कभी निकल नहीं पाते थे।


3. भारतीय कृषि तकनीकी रूप से पिछड़ी रही।

 कारण: क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने कृषि सुधार पर कोई ध्यान नहीं दिया। सारा पैसा भारत से इंग्लैंड ले जाया गया, सिंचाई, अच्छे बीज और नई तकनीक पर खर्च नहीं किया गया। किसान गरीब थे इसलिए पुराने औजारों - हल, बैल से ही खेती करते रहे।


(च). निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -


प्रश्न 1. ब्रिटिश शासन में किसानों की अत्यंत शोचनीय स्थिति के क्या कारण थे?

उत्तर: अंग्रेजों ने लगान बहुत बढ़ा दिया था जो नकद और समय पर देना पड़ता था। फसल खराब होने पर भी माफी नहीं मिलती थी। किसानों को साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था और वे ब्याज के जाल में फंस गए। साथ ही उन्हें जबरदस्ती नील जैसी नकदी फसलें उगाने को कहा गया।


प्रश्न 2. जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आई, उसका प्रमुख उद्देश्य क्या था?

 उत्तर: शुरुआत में कंपनी का मुख्य उद्देश्य व्यापार करना था। वह भारत से मसाले, रेशम, सूती कपड़ा और नील जैसी चीजें सस्ते में खरीदकर यूरोप में महंगे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाना चाहती थी। बाद में उसका उद्देश्य राजनीतिक शक्ति हासिल करना बन गया।


प्रश्न 3. अंग्रेजों की भूमि संबंधी नीति समझाइए।

उत्तर: अंग्रेजों ने तीन मुख्य नीतियां लागू की - स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी। इनमें जमीन का मालिक जमींदार या किसान नहीं बल्कि अंग्रेज सरकार को माना गया। किसानों से बहुत अधिक लगान वसूला गया और जमीन छीनने का डर दिखाया गया।


प्रश्न 4. ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आरंभिक वर्षों में कौन-कौन से विद्रोह हुए?

उत्तर: आरंभ में संन्यासी विद्रोह, चुआर विद्रोह, कोल विद्रोह, खोंड विद्रोह, संथाल विद्रोह और नील विद्रोह हुए। ये सभी विद्रोह किसानों और आदिवासियों ने अंग्रेजों के अत्याचार, अधिक लगान और जमीन छीने जाने के खिलाफ किए थे।


प्रश्न 5. अंग्रेजों ने भारत के धन का दोहन किस प्रकार किया?

उत्तर: अंग्रेज भारत से कच्चा माल सस्ते में इंग्लैंड ले जाते थे और वहां बना पक्का माल भारत में महंगे दाम पर बेचते थे। उन्होंने भारत के खजाने, करों और संसाधनों से प्राप्त धन को इंग्लैंड भेज दिया। इसे ही धन का दोहन या निष्कासन कहा जाता है।


प्रश्न 6. बंगाल के बुनकरों की दरिद्रता का कारण क्या था?

उत्तर: अंग्रेजों ने बुनकरों को जबरदस्ती कम दाम पर कपड़ा कंपनी को ही बेचने को मजबूर किया। इंग्लैंड से मशीनों से बना सस्ता कपड़ा भारत में आने से हाथ से बना कपड़ा बिकना बंद हो गया। इससे बुनकर बेरोजगार और गरीब हो गए।


प्रश्न 7. धन के दोहन अथवा निष्कासन से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: जब भारत में कमाया गया धन या भारत के संसाधनों से प्राप्त आय को बिना किसी बदले के इंग्लैंड भेज दिया जाता था, तो उसे धन का दोहन या निष्कासन कहते हैं। इससे भारत गरीब होता गया और इंग्लैंड अमीर।


प्रश्न 8. बिरसा मुंडा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: बिरसा मुंडा छोटा नागपुर क्षेत्र के एक महान आदिवासी नेता थे। उन्होंने 1895-1900 में अंग्रेजों, जमींदारों और मिशनरियों के खिलाफ 'उलगुलान' (महान विद्रोह) किया। उन्होंने अपनी जमीन और संस्कृति की रक्षा का संदेश दिया। 1900 में उनकी मृत्यु हो गई पर वे आज भी भगवान बिरसा के रूप में याद किए जाते हैं।


प्रश्न 9. जमींदारों की स्थिति पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।

उत्तर: शुरुआत में स्थायी बंदोबस्त से पुराने जमींदारों को फायदा हुआ। लेकिन बाद में जो जमींदार समय पर लगान नहीं दे पाते थे, उनकी जमींदारी नीलाम कर दी गई। इससे कई पुराने जमींदार बर्बाद हो गए और उनकी जगह शहरों में रहने वाले नए अमीर जमींदार आ गए जो किसानों का शोषण करते थे।


प्रश्न 10. किसानों एवं जमींदारों ने विद्रोह का मार्ग क्यों चुना?

उत्तर: क्योंकि अंग्रेजों ने उन पर बहुत अधिक लगान लगा दिया था और उनकी जमीनें छीन ली जा रही थीं। उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं था। शांतिपूर्ण तरीके से न्याय न मिलने पर उन्हें अपनी जमीन और हक बचाने के लिए हथियार उठाकर विद्रोह करना पड़ा।


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