अध्याय 4 औद्योगीकरण का युग | The Age of Industrialization | Class 10 Notes & Solutions

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 महत्वपूर्ण शब्दावली

• औद्योगीकरण : औद्योगीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें हाथों और पारंपरिक औजारों की जगह नई मशीनों, आधुनिक तकनीकों और बड़े-बड़े कारखानों द्वारा वस्तुओं का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है।

• आदि-औद्योगीकरण : कारखानों से पहले का समय। किसान अपने घर में ही व्यापारियों के लिए कपड़ा बुनते थे। गाँव के घर ही कारखाने था।


• उड़न तुरी : जॉन के ने 1733 में बनाया। इससे बुनाई तेज़ हो गई।


• स्पिनिंग जेनी : जेम्स हारग्रीव्स की खोज। एक साथ आठ तकलियाँ घूमती थीं, धागा जल्दी बनता था।


• वाटर फ्रेम : रिचर्ड आर्कराइट का चरखा जो पानी की शक्ति से चलता था।


• भाप इंजन : जेम्स वाट ने 1781 में सुधारा। इससे कारखाने नदी किनारे से हटकर कहीं भी लगने लगे।


• कारखाना प्रणाली : सब मज़दूर एक छत के नीचे, मालिक की निगरानी में काम करना। समय और अनुशासन।


• गुमाश्ता : ईस्ट इंडिया कंपनी का एजेंट जो बुनकरों को पेशगी देकर सस्ता कपड़ा लेता था।


• औद्योगिक पूँजीवाद : पैसा लगाकर कारखाना लगाना और मज़दूरों से मुनाफा कमाना।


the age of industrilization


महत्त्वपूर्ण व्यक्ति


• जेम्स हारग्रीव्स : स्पिनिंग जेनी के आविष्कारक।


• रिचर्ड आर्कराइट : सूती मिल और वाटर फ्रेम के निर्माता, पहली कपास फैक्ट्री के मालिक।


• जेम्स वाट : भाप इंजन को बेहतर बनाने वाले, औद्योगिक क्रांति के नायक।


• जमशेदजी नुसरवानजी टाटा : भारत के पहले बड़े उद्योगपति, जमशेदपुर में लोहा-इस्पात कारखाना लगाने वाले। भारत में औद्योगीकरण के जनक।


• द्वारकानाथ टैगोर : बंगाल के पहले भारतीय उद्योगपति, कोयला, जहाज़ और बैंक के कारोबार में पैसा लगाया।


• सेठ हुकुमचंद : मारवाड़ी व्यापारी जिन्होंने कलकत्ता में पहली जूट मिल लगाई।


• सर दिनशॉ मानेकजी पेटिट : मुंबई के बड़े कपड़ा मिल मालिक।


लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 : आदि-औद्योगीकरण क्या है?

उत्तर : कारखानों के आने से पहले इंग्लैंड में घरों में होने वाला उत्पादन आदि-औद्योगीकरण कहलाया। किसान खेती के साथ-साथ व्यापारियों के लिए कपड़ा बुनते थे, गाँव ही कारखाना था।


प्रश्न 2 : इंग्लैंड में सबसे पहले औद्योगिक क्रांति क्यों हुई?

उत्तर : इंग्लैंड में सबसे पहले औद्योगिक क्रांति के दो मुख्य कारण थे - (1) इंग्लैंड के पास उपनिवेशों से सस्ता कच्चा माल और बड़ा बाज़ार था। (2) कोयला और लोहे की खदानें पास-पास थीं और पूँजीपति वर्ग तैयार था।


प्रश्न 3 : ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय बुनकरों को कैसे बर्बाद किया?

उत्तर : कंपनी ने गुमाश्ता नियुक्त किए, बुनकरों को पेशगी देकर बंधक बनाया, कच्चा माल महँगा बेचा और तैयार कपड़ा सस्ते में लिया। बुनकर कर्ज़ में डूब गए।


प्रश्न 4 : फ्लाइंग शटल और स्पिनिंग जेनी क्या है?

उत्तर : फ्लाइंग शटल (1733, जॉन के) से बुनाई तेज़ हुई। स्पिनिंग जेनी (जेम्स हारग्रीव्स) से एक साथ 8 धागे काते जा सकते थे, जिससे धागे का उत्पादन बढ़ा।


प्रश्न 5 : जेम्स वाट का योगदान क्या था?

उत्तर : जेम्स वाट ने 1781 में भाप इंजन में सुधार किया। अब कारखानों को नदी किनारे से हटाकर कहीं भी लगाया जा सकता था, इससे बड़े कारखाने बने।


प्रश्न 6 : कारखाना प्रणाली की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर : (1) सैकड़ों मज़दूर एक छत के नीचे एक साथ काम करते थे। (2) काम का समय, अनुशासन और निगरानी मालिक तय करता था, कारीगर की स्वतंत्रता खत्म हो गई।


प्रश्न 7 : भारत में पहली सूती मिल और जूट मिल कब और कहाँ लगी?

उत्तर : भारत में पहली सूती मिल 1854 में बम्बई में और पहली जूट मिल 1855 में कलकत्ता (रिशरा) में लगी।


प्रश्न 8 : द्वारकानाथ टैगोर और जमशेदजी टाटा कौन थे?

उत्तर : द्वारकानाथ टैगोर बंगाल के पहले भारतीय उद्योगपति थे जिन्होंने कोयला, जहाजरानी में निवेश किया। जमशेदजी टाटा को भारत के औद्योगिक पिता कहते हैं, उन्होंने जमशेदपुर में टिस्को की स्थापना की।


प्रश्न 9 : औद्योगीकरण से इंग्लैंड के मज़दूरों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर : मज़दूरों को कम वेतन, 14-16 घंटे काम, गंदी बस्तियों में रहना पड़ा। बाल-मज़दूरी बढ़ी और बेरोजगारी भी बढ़ी क्योंकि हाथ के कारीगर बेकार हो गए।


प्रश्न 10 : विक्टोरिया काल में इंग्लैंड में हाथ से बनी चीजों को लोग क्यों पसंद करते थे?

उत्तर : क्योंकि हाथ से बनी चीजों पर बारीक डिजाइन होता था, वह विशिष्ट और महँगी होती थीं। उच्च वर्ग मशीन की एक जैसी चीजों से अलग दिखने के लिए हाथ की बनी चीजें खरीदता था।


प्रश्न 11 : मैनचेस्टर से भारत में कपड़ा आना भारतीय बुनकरों के लिए समस्या क्यों बना?*

उत्तर : मैनचेस्टर का मशीन से बना सस्ता कपड़ा भारत में भर गया। भारतीय कपड़ा महँगा पड़ने लगा, बुनकरों का माल नहीं बिका और वे कंगाल हो गए।


प्रश्न 12 : 19वीं सदी में भारतीय उद्योगपतियों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?*

उत्तर : (1) अंग्रेजी सरकार से आयात पर कम कर और भारतीय माल पर ज्यादा कर। (2) यूरोपीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा और पूँजी की कमी। (3) विदेशों में भारतीय माल पर प्रतिबंध।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 : औद्योगीकरण से पहले इंग्लैंड के गरीब किसान और कारीगर व्यापारी से काम क्यों लेते थे?

उत्तर : इंग्लैंड में 17वीं सदी में आबादी बढ़ने से गरीब किसानों की जमीन छोटी हो गई। खेती से गुजारा नहीं होता था। तब शहर के व्यापारी गाँव में आकर उन्हें कपड़ा बुनने, धागा कातने का काम देते थे। इससे किसान को खाली समय में अतिरिक्त आय मिलती थी और व्यापारी को सस्ता माल। यही कारण था कि गरीब लोग इस व्यवस्था को मान लेते थे।


प्रश्न 2 : कारखानों में महिलाओं और बच्चों की स्थिति पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर : कारखानों में महिलाओं और बच्चों की हालत बहुत खराब थी। मालिक उन्हें इसलिए रखते थे क्योंकि उन्हें कम वेतन देना पड़ता था और वे आसानी से काबू में आ जाते थे। बच्चों को कपड़ा मिलों में धागे जोड़ने के लिए ऊँची मशीनों के नीचे घुसाया जाता था, जहाँ अक्सर उनके हाथ कट जाते थे। महिलाएँ 12-14 घंटे काम करती थीं, जिससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया।


प्रश्न 3 : औद्योगिक क्रांति के बाद इंग्लैंड के शहरों का विकास कैसे हुआ?

उत्तर : औद्योगिक क्रांति के बाद इंग्लैंड में लंदन, मैनचेस्टर, लिवरपूल जैसे शहर तेजी से बड़े। गाँव के बेकार कारीगर और किसान काम की तलाश में शहर आए। कारखानों के पास झुग्गी-बस्तियाँ बनीं। शहरों में नहरें, रेलवे और पुल बने ताकि कच्चा माल और तैयार माल लाया-ले जाया जा सके। इससे शहर व्यापार का केंद्र बन गए।


प्रश्न 4 : ब्रिटिश सरकार ने भारत में मैनचेस्टर के कपड़े को बढ़ावा क्यों दिया?

उत्तर : ब्रिटिश सरकार की दोहरी नीति थी। इंग्लैंड की मिलों का कपड़ा बेचने के लिए भारत को बाजार बनाया गया। भारत में आयात पर बहुत कम कर रखा गया ताकि मैनचेस्टर का कपड़ा सस्ता बिके। वहीं भारतीय कपड़े पर इंग्लैंड में भारी कर लगाया गया ताकि वहाँ भारतीय कपड़ा न बिक सके। इससे ब्रिटेन को दोहरा फायदा हुआ।


प्रश्न 5 : विज्ञापनों और लेबलों ने भारत में विदेशी माल को कैसे लोकप्रिय बनाया?

उत्तर : जब मैनचेस्टर का कपड़ा भारत आया तो कंपनियों ने विज्ञापन का सहारा लिया। कपड़ों के बंडलों पर देवी-देवताओं, महाराजाओं के चित्र वाले लेबल लगाए गए ताकि भारतीय लोग उन्हें अपना समझें। कैलेंडर और अखबारों में विज्ञापन दिए गए कि "मैनचेस्टर का कपड़ा पहनने से आप आधुनिक और सभ्य दिखेंगे"। इससे लोगों में विदेशी माल के प्रति आकर्षण बढ़ा।


प्रश्न 6 : औद्योगीकरण के युग में छोटे उद्योग और कारीगर पूरी तरह खत्म क्यों नहीं हुए?

उत्तर : बड़े कारखानों के बावजूद छोटे उद्योग बचे रहे, इसके 2 कारण थे। (1) अमीर लोग हाथ से बनी विशिष्ट और महँगी चीजें पसंद करते थे, जैसे बारीक कढ़ाई वाले कपड़े। (2) कई उत्पाद जैसे ताले, चाकू, औजार मशीन से नहीं बन सकते थे, उन्हें हाथ से ही बनाना पड़ता था। इसलिए छोटे कारीगरों और कार्यशालाओं की माँग बाजार में बनी रही।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 : इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के कारणों की विस्तार से व्याख्या कीजिए।

उत्तर : इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के 5 मुख्य कारण थे-

(i) कच्चा माल और बाजार : इंग्लैंड के पास भारत जैसे बड़े उपनिवेश थे जहाँ से सस्ता कपास मिलता था और जहाँ तैयार माल बेचा जा सकता था।

(ii) पूँजी :17वीं सदी में व्यापार से इंग्लैंड के व्यापारियों के पास बहुत पैसा जमा हो गया था जिसे वे कारखानों में लगा सकते थे।

(iii) प्राकृतिक संसाधन : इंग्लैंड में कोयला और लोहा एक ही क्षेत्र में मिलते थे, जिससे मशीनें बनाना आसान था।

(iv) तकनीकी खोजें : फ्लाइंग शटल, स्पिनिंग जेनी, वाटर फ्रेम और भाप इंजन जैसी खोजों ने उत्पादन को 10 गुना बढ़ा दिया।

(v) श्रमिकों की उपलब्धता : गाँव के बेकार कारीगर और गरीब किसान सस्ते मजदूर के रूप में शहरों में आ गए।

इन सभी कारणों से औद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में ही हुई।


प्रश्न 2 : भारत में औद्योगिकीकरण धीमा क्यों रहा? ब्रिटिश नीतियों ने इसे कैसे प्रभावित किया?

उत्तर : भारत में औद्योगीकरण धीमा रहने के 3 बड़े कारण थे -

(i) ब्रिटिश सरकार की भेदभाव नीति : सरकार ने भारत को सिर्फ कच्चा माल देने वाला देश बनाया। मैनचेस्टर के कपड़े पर आयात कर बहुत कम रखा गया और भारतीय कपड़े पर इंग्लैंड में भारी कर लगाया गया।

(ii) पूँजी की कमी : भारतीय व्यापारियों के पास पैसा था लेकिन उन्हें बैंक से कर्ज नहीं मिलता था, जबकि अंग्रेज व्यापारियों को आसानी से कर्ज मिल जाता था।

(iii) तकनीकी शिक्षा का अभाव : अंग्रेजों ने भारत में तकनीकी स्कूल नहीं खोले ताकि भारतीय खुद मशीनें न बना सकें।

फिर भी द्वारकानाथ टैगोर, जमशेदजी टाटा जैसे उद्योगपतियों ने हिम्मत दिखाई। 1854 में बम्बई में पहली सूती मिल और 1912 में जमशेदपुर में टिस्को की स्थापना से भारत में आधुनिक उद्योगों की शुरुआत हुई।


प्रश्न 3 : औद्योगीकरण ने भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव डाला?

उत्तर : औद्योगीकरण का भारतीय समाज पर मिला-जुला प्रभाव पड़ा -

नकारात्मक प्रभाव : (i) भारत के प्रसिद्ध बुनकर और कारीगर बेकार हो गए क्योंकि मशीन का सस्ता कपड़ा बाजार में आ गया। (ii) गाँव की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था टूट गई, किसान सिर्फ कच्चा माल उगाने लगे। (iii) धन का निकास इंग्लैंड की ओर होने लगा।

सकारात्मक प्रभाव : (i) बम्बई, कलकत्ता, अहमदाबाद जैसे नए औद्योगिक शहर बने। (ii) रेलवे, सड़कें और बंदरगाह बने जिससे आवागमन आसान हुआ। (iii) एक नया मजदूर वर्ग और मध्यम वर्ग पैदा हुआ जिसने बाद में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। (iv) लोगों में नई सोच और आधुनिकता आई।


प्रश्न 4 : कारखाना प्रणाली क्या है? इसने मजदूरों के जीवन को कैसे बदला?

उत्तर : कारखाना प्रणाली वह व्यवस्था है जहाँ सैकड़ों मजदूर एक ही इमारत में, एक ही मालिक की निगरानी में, निश्चित समय पर काम करते हैं। यह आदि-औद्योगीकरण से बिल्कुल अलग थी जहाँ कारीगर अपने घर में स्वतंत्र रूप से काम करता था।

मजदूरों के जीवन में बदलाव :

• समय का बंधन : अब मजदूर को सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक घंटी बजने पर काम करना पड़ता था, देर होने पर जुर्माना लगता था।

• अनुशासन : कारखाने में बात करना, हँसना मना था, हर गतिविधि पर निगरानी थी।

• जीवन स्तर में गिरावट : कम वेतन के कारण मजदूर गंदी, अंधेरी झुग्गी-बस्तियों में रहने लगे जहाँ पीने का पानी भी साफ नहीं था।

• परिवार का बिखराव : पूरा परिवार - पति, पत्नी और बच्चे अलग-अलग कारखानों में काम करने लगे, पारिवारिक जीवन खत्म हो गया।

इस प्रकार कारखाना प्रणाली ने कारीगर को स्वतंत्र कारीगर से वेतनभोगी मजदूर बना दिया।





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