प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. संविधान द्वारा दिए मौलिक अधिकारों के नाम लिखिए।
उत्तर: भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं:
- समता (समानता) का अधिकार
- स्वतंत्रता का अधिकार
- शोषण के विरुद्ध अधिकार
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
- संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार
प्रश्न 2. भारत के नागरिकों की किन्हीं चार स्वतंत्रताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: भारतीय नागरिकों को प्राप्त चार प्रमुख स्वतंत्रताएँ निम्नलिखित हैं:
- भाषण और विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
- बिना हथियारों के शांतिपूर्वक एकत्र होने और सभा करने की स्वतंत्रता।
- संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता।
- भारत के किसी भी भाग में आने-जाने और निवास करने की स्वतंत्रता।
प्रश्न 3. समता के अधिकार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: समता (समानता) के अधिकार का अर्थ है कि कानून की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं। किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, लिंग, नस्ल या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। यह अधिकार समाज में असमानता और अस्पृश्यता (छुआछूत) को समाप्त करता है।
प्रश्न 4. भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के विषय में विस्तार से लिखिए।
उत्तर: भारतीय संविधान के भाग-3 में नागरिकों के सर्वांगीण विकास और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए 6 मौलिक अधिकार दिए गए हैं। ये अधिकार नागरिकों को सरकार की मनमानी से बचाते हैं और लोकतंत्र को मजबूत करते हैं। यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, तो वह संरक्षण के लिए सीधे न्यायालय (कोर्ट) की शरण ले सकता है।
प्रश्न 5. संविधान में मूल कर्तव्यों को सम्मिलित करने का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: मूल कर्तव्यों को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को यह अहसास दिलाना है कि अधिकारों का उपभोग करने के साथ-साथ उनके देश, समाज और संविधान के प्रति भी कुछ दायित्व (कर्तव्य) हैं। यह नागरिकों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और एकता की भावना को बढ़ावा देते हैं।
प्रश्न 6. राज्य के किन्हीं पाँच नीति निर्देशक सिद्धांतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में से पाँच प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
- सभी नागरिकों के लिए जीविका के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराना।
- स्त्री और पुरुषों को समान कार्य के लिए समान वेतन देना।
- 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करना।
- ग्राम पंचायतों का गठन करना।
- समाज के कमजोर वर्गों (SC/ST) के शैक्षणिक और आर्थिक हितों की रक्षा करना।
प्रश्न 7. न्यायालयों को नागरिकों के अधिकारों का संरक्षक क्यों कहा जाता है?
उत्तर: न्यायालयों को अधिकारों का संरक्षक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यदि सरकार या कोई व्यक्ति किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन करता है, तो नागरिक न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है। न्यायालय विशेष आदेश (रिट) जारी करके नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और उन्हें बहाल करता है।
प्रश्न 8. समाज के कमजोर वर्गों को कौन-सी विशेष सुविधाएँ प्रदान की गई हैं और क्यों?
उत्तर: समाज के कमजोर वर्गों (अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग) को शिक्षा संस्थानों में आरक्षण, छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरियों में छूट और मुफ्त कानूनी सहायता जैसी विशेष सुविधाएँ दी गई हैं।
कारण: इन सुविधाओं का उद्देश्य सदियों से पिछड़े रहे इन वर्गों को समाज की मुख्यधारा में लाना और सामाजिक-आर्थिक समानता स्थापित करना है।
कारण: इन सुविधाओं का उद्देश्य सदियों से पिछड़े रहे इन वर्गों को समाज की मुख्यधारा में लाना और सामाजिक-आर्थिक समानता स्थापित करना है।
प्रश्न 9. मौलिक अधिकार कितने हैं?
उत्तर: भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को वर्तमान में कुल 6 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं। (मूल संविधान में 7 थे, लेकिन संपत्ति के अधिकार को हटा दिया गया)।
प्रश्न 10. हमारे मौलिक कर्तव्यों में से किन्हीं दो को लिखिए।
उत्तर: हमारे दो प्रमुख मौलिक कर्तव्य निम्नलिखित हैं:
- संविधान का पालन करना तथा उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना।
- भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना और उसे बनाए रखना।

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