Indigo | Class 12 English Chapter 5 Summary in Hindi | Flamingo | Louis Fischer

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लेखक का परिचय (Writer's Intro)

लुइस फिशर (Louis Fischer) एक अमेरिकी पत्रकार और जीवनी लेखक (Biographer) थे, जिन्हें महात्मा गांधी की सबसे सटीक जीवनी लिखने के लिए जाना जाता है। उनकी लिखने की शैली सीधी और तथ्यों (Facts) पर आधारित है। यह अध्याय, उनकी किताब The Life of Mahatma Gandhi का एक हिस्सा है, जो चंपारण में न्याय के लिए गांधीजी के संघर्ष की कहानी बताता है।

Indigo class 12 English chapter 5 summary in hindi

अध्याय का परिचय (Chapter Intro)

Indigo चंपारण के बटाईदारों (Sharecroppers) के लिए महात्मा गांधी की लड़ाई के बारे में है, जिन्हें अंग्रेज जमींदारों द्वारा नील (Indigo) की खेती करने के लिए मजबूर किया जाता था। यह अध्याय गांधीजी के नेतृत्व, न्याय के प्रति उनके समर्पण और अंग्रेजी शासन को चुनौती देने के लिए शांतिपूर्ण विरोध के उनके तरीके को दिखाता है। यह एक ताकतवर कहानी है जो बताती है कि कैसे एक साधारण सा विरोध अन्याय के खिलाफ एक बड़ी जीत बन सकता है।

पात्रों का परिचय (Characters Intro)

 * महात्मा गांधी: एक विनम्र और दृढ़ नेता। उनका दिमाग बहुत तेज था और उनमें नैतिक हिम्मत थी। उन्होंने चंपारण के गरीब किसानों को ताकत देने के लिए शांतिपूर्ण विरोध शुरू किया।

 * राजकुमार शुक्ल: चंपारण का एक अनपढ़ किसान। गांधीजी को अपने जिले में लाने का उसका पक्का इरादा ही इस पूरे आंदोलन की वजह बना।

 * चार्ल्स फ्रीर एंड्रयूज: एक अंग्रेज शांतिवादी (Pacifist) और गांधीजी का सच्चा भक्त। किसानों की मदद करने की उसकी इच्छा यह दिखाती है कि वह उनके साथ था, लेकिन गांधीजी ने कहा कि भारतीयों को अपनी लड़ाई खुद जीतनी चाहिए।

 * अंग्रेज जमींदार (The British Landlords): ताकतवर जमींदार जो किसानों का शोषण करते थे। वे उस अंग्रेजी शासन का प्रतीक थे जिसे गांधीजी खत्म करना चाहते थे।

पाठ का सारांश (Chapter Summary)

यह अध्याय 1942 में सेवाग्राम में गांधीजी के आश्रम में लुइस फिशर की यात्रा से शुरू होता है। गांधीजी उन्हें भारत में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत के बारे में बताते हैं, जो राजकुमार शुक्ल नाम के एक किसान के आने से शुरू हुआ था। शुक्ल चंपारण का एक जिद्दी लेकिन अनपढ़ बटाईदार था। वह चाहता था कि गांधीजी उसके जिले में आएं और उन किसानों की मदद करें जो एक अन्यायपूर्ण व्यवस्था (System) में पिस रहे थे। सालों से, अंग्रेज जमींदारों ने किसानों को अपनी 15 प्रतिशत जमीन पर नील (Indigo) उगाने और पूरी फसल को किराए (Rent) के रूप में देने के लिए मजबूर किया हुआ था।

गांधीजी मिलने के लिए तैयार हो गए लेकिन वह व्यस्त थे और उन्हें यात्रा करनी थी। शुक्ल हर जगह उनके पीछे-पीछे गया, एक जगह से दूसरी जगह, जब तक कि गांधीजी ने हार मानकर नहीं कह दिया, "मुझे उस तारीख को कलकत्ता में रहना है... वहां आकर मुझसे मिलो और मुझे ले चलो।" इस साधारण और धैर्यवान संकल्प ने गांधीजी को बहुत प्रभावित किया।

पटना पहुंचने पर, शुक्ल गांधीजी को डॉ. राजेंद्र प्रसाद (जो बाद में भारत के पहले राष्ट्रपति बने) के घर ले गया। नौकरों ने सोचा कि गांधीजी भी कोई साधारण किसान हैं, इसलिए उन्होंने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। फिर गांधीजी मुजफ्फरपुर गए, जहां वकीलों ने उन्हें किसानों की स्थिति के बारे में बताया। गांधीजी ने गरीब किसानों से भारी फीस लेने के लिए वकीलों को डांटा और कहा कि कोर्ट (Court) जाना बेकार है। असली समाधान किसानों के मन से डर को निकालना था।

गांधीजी ने सीधे किसानों से जानकारी इकट्ठा करने का फैसला किया। जल्द ही उन्हें अंग्रेज अधिकारियों ने बुलाया। चंपारण छोड़ने का आदेश मिलने के बावजूद, गांधीजी ने मना कर दिया। उन्होंने एक नोट लिखा कि वह आदेश नहीं मानेंगे और सजा भुगतने के लिए तैयार हैं। यह सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience) एक महत्वपूर्ण मोड़ था। लोग उनके साथ खड़े हो गए और अंग्रेजों को एहसास हुआ कि वे अब स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकते।

गांधीजी के खिलाफ केस वापस ले लिया गया, और उन्होंने अपनी जांच जारी रखी। उन्होंने और वकीलों की उनकी टीम ने किसानों से हजारों बयान (depositions) इकट्ठा किए। इस सामूहिक कार्रवाई से जमींदार घबरा गए। अब उनका सामना एक संगठित विरोध से था। आखिरकार, अंग्रेज अधिकारी समझौते के लिए तैयार हो गए। गांधीजी ने किसानों की तरफ से बातचीत की। उन्होंने लूटे गए पूरे पैसे की मांग नहीं की। इसके बजाय, उन्होंने 50 प्रतिशत वापसी की मांग की, और जब जमींदारों ने 25 प्रतिशत का प्रस्ताव दिया, तो गांधीजी मान गए। यह एक प्रतीकात्मक (symbolic) जीत थी। किसानों के लिए, पैसा वापस मिलना, चाहे थोड़ा ही हो, इस बात का सबूत था कि उनके पास अधिकार हैं और वे अपने अत्याचारियों के सामने खड़े हो सकते हैं।

चंपारण में गांधीजी की जीत सिर्फ पैसा वापस पाने के बारे में नहीं थी। यह आत्मनिर्भरता (self-reliance) का एक बड़ा सबक था। वह समझते थे कि किसानों को डर से मुक्त करना पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस सफल आंदोलन ने भारतीयों को अपनी ताकत का एहसास कराया। गांधीजी ने स्कूल खोलकर और साफ-सफाई सिखाकर गांवों में रहने की स्थिति को सुधारने का भी काम किया। उन्होंने अपने समर्थकों को समझाया कि वे अपनी लड़ाई जीतने के लिए चार्ल्स फ्रीर एंड्रयूज जैसे किसी अंग्रेज पर भरोसा नहीं कर सकते। उन्हें आत्मनिर्भर बनना सीखना होगा।

Important Themes and Points (महत्वपूर्ण विषय और बिंदु)

यह अध्याय सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience), दृढ़ संकल्प की शक्ति और आजादी पाने में आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) के महत्व पर केंद्रित है। यह दिखाता है कि असली ताकत अंदर से आती है।

Important Question and Answers (महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर)

1. चंपारण बटाईदार व्यवस्था (sharecropper system) क्या थी?

उत्तर: इस व्यवस्था के तहत, अंग्रेज जमींदारों ने किसानों को अपनी 15% जमीन पर नील (indigo) बोने और पूरी फसल किराए के रूप में देने के लिए मजबूर किया। यह एक शोषणकारी और अन्यायपूर्ण समझौता था।

2. राजकुमार शुक्ल को "दृढ़ निश्चयी" (resolute) क्यों कहा गया?

उत्तर: राजकुमार शुक्ल दृढ़ निश्चयी थे क्योंकि उन्होंने गांधीजी को चंपारण आने के लिए मनाने के लिए हफ्तों तक लगातार उनका पीछा किया। उनका यह पक्का इरादा ही गांधीजी को इसमें शामिल करने का मुख्य कारण था।

3. गांधीजी ने मुजफ्फरपुर के वकीलों को क्यों डांटा?

उत्तर: गांधीजी ने गरीब बटाईदारों से भारी फीस लेने के लिए वकीलों को डांटा। उनका मानना था कि कोर्ट जाना बेकार है और डरे हुए किसान की मदद महंगी कानूनी सलाह से नहीं हो सकती।

4. चंपारण में गांधीजी के सामने "कर्तव्यों का संघर्ष" (Conflict of Duties) क्या था?

उत्तर: गांधीजी के सामने कानून का पालन करने और मानवता की सेवा करने के बीच संघर्ष था। उन्होंने चंपारण छोड़ने के आदेश को नहीं मानने का फैसला किया क्योंकि उन्हें लगा कि गरीब किसानों के प्रति उनका कर्तव्य कानून के प्रति उनके कर्तव्य से बड़ा है।

5. चंपारण आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ कैसे था?

उत्तर: चंपारण आंदोलन भारत में सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience) का पहला सफल उदाहरण था। इसने दिखाया कि अहिंसक विरोध अंग्रेजों की सत्ता को प्रभावी ढंग से चुनौती दे सकता है और इसने भारतीयों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने की हिम्मत दी।

6. गांधीजी जमींदारों से केवल 25 प्रतिशत वापसी (refund) पर क्यों सहमत हुए?

उत्तर: गांधीजी 25 प्रतिशत वापसी पर सहमत हुए क्योंकि वे इसे एक प्रतीकात्मक जीत मानते थे। यह पैसे के बारे में नहीं था, बल्कि जमींदारों के झुकने और किसानों को यह महसूस कराने के बारे में था कि उनके पास अधिकार हैं।

7. गांधीजी ने चार्ल्स फ्रीर एंड्रयूज को जाने के लिए क्यों कहा?

उत्तर: गांधीजी ने एंड्रयूज को जाने के लिए कहा क्योंकि वे चाहते थे कि भारतीय आत्मनिर्भर (self-reliant) बनें। उनका मानना था कि मदद के लिए किसी अंग्रेज पर निर्भर रहने से उनका संकल्प और हिम्मत कमजोर हो जाएगी।

8. गांधीजी ने चंपारण के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में क्या बदलाव लाए?

उत्तर: गांधीजी ने स्कूल खोले और ग्रामीणों को साफ-सफाई और निजी स्वच्छता (hygiene) के बारे में सिखाया। उन्होंने किसानों के रहने की स्थिति को सुधारने में मदद करने के लिए अपने समर्थकों और उनके परिवारों को भी शामिल किया।

9. अंग्रेज जमींदार अंततः समझौते के लिए क्यों सहमत हुए?

उत्तर: जमींदार इसलिए मान गए क्योंकि वे गांधीजी के संगठित विरोध और उन्हें मिल रहे भारी समर्थन से डर गए थे। उन्हें एहसास हुआ कि उनकी सत्ता को खुले तौर पर चुनौती दी जा रही है और उन्हें बातचीत करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

10. गांधीजी ने किसानों की समस्या का असली समाधान क्या माना?

उत्तर: गांधीजी ने असली समाधान यह माना कि किसानों को अंग्रेजों के डर से मुक्त किया जाए। उनका मानना था कि एक बार जब वे अपने डर पर काबू पा लेंगे, तो वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकेंगे और आत्मनिर्भर बन सकेंगे।


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